परीक्षा
एक बार की बात परीक्षा निकट आ गई |
मानो मेरे लिए समस्या विकट आ गई ||
***************************
सपने आते ,रात-रात भर नींद न ढंग से आती ,
पढ़ते-पढ़ते सारी रात जल्द ही बीत भी जाती ||
**************************
सपने आते , ऐसे लगता ,मानो मैं कमरे में बैठा ,
प्रश्न -पत्र हाथों में लेकर, हल करने में पूरा तत्पर ||
**************************
एक प्रश्न था थोड़ा वैसा ,मानो नहीं कभी था देखा ,
नहीं ज्ञात था उसका उत्तर ,फिर भी सोचा फिर भी देखा ||
**************************
बहुत पैर सिर मारा लेकिन ,ज्ञात हुआ न उसका उत्तर ,
धड़कन बढ़ी घड़ी जब देखा धीरे-धीरे समय भी खिसका ||
************************
तेज -तेज से लिखे जा रहा ,प्रश्न नहीं पर ख़तम हो रहा ,
लेख नहीं था कुछ भी सुन्दर ,फेल न हो जाऊं यह था डर||
*************************
कभी-कभी तो लगता ऐसे ,प्रश्न छूट जायेंगे जैसे ,
प्रश्न छूट गर गये भला तो ,अच्छे अंक मिलेंगे कैसे ||
************************
ख़तम हो गई पेन की स्याही , मैंने तब आवाज लगाईं ,
सुनकर के आवाज़ मेरी तब ,दौड़ी-दौड़ी मम्मी आई ||
*************************
नींद खुली तब मैंने देखा ,मैं बिस्तर पर पड़ा था लेटा,
न ही कलम था ,न ही था पेपर ,स्वप्न परीक्षा का था मुझ पर ||
**************************
![]() |
| Add caption |

No comments:
Post a Comment