हमसफ़र बिन सफर है ये कैसा सफर।
जिंदगी अब लगे, जैसे सूनी डगर।।
हर कदम पर सदा साथ तुमने दिए।
मुश्किलों में तुम्हें साथ पाए थे हम।।
अब पराया सा लगता है संसार ये।
अब किसे कहके अपना बुलायेंगे हम।।
अब करेगा भला कौन मेरी फिकर।
जिंदगी अब लगे, जैसे सूनी डगर।।
एक पल था कि जब तुम मिले थे मुझे।
फूल खुशियों के जीवन में खिलने लगे।।
प्यार की रोशनी ज़िंदगी को मिली।
फिर बहारों के सौगात मिलने लगे।।
आज जीवन की कश्ती फँसी है भँवर।
जिंदगी अब लगे, जैसे सूनी डगर।।
अब भरोसा करें किस जमाने पे हम।
जो जमाना किसी का हुआ ही नहीं।।
दिल धड़कता नहीं अब तुम्हारे बिना।
और आँखें तुम्हें खोज थकती नहीं।।
एक दीदार को बस तरसती नज़र।।
जिंदगी अब लगे, जैसे सूनी डगर।।