मन पंछी उड़ि चलियो ,
मन पंछी उड़ि चलियो ,
जहाँ हो चैन की बगिया |
रकम-रकम के बिरवा हों जहाँ मलय पवन की छहिंया |
द्वेष –प्रेम दोउ गले मिलत हों बन जीवन की पहिया ||
राग रंग के पुष्प खिले हों भ्रमर भुलत जहाँ रहिया |
मस्त लुभावन मन को भावन टेरत सुर जहाँ पपिहा ||
मधुर मनोहर पिक सुरसरिता बहती बिनु छन रुकिया |
हर दरख़्त जहाँ
झूम झूमकर फाग सुनावत रसिया ||
पादपपुष्प झूमत
मस्ती से करत संग
अठखेलियाँ |
कहत ‘आजाद’ सुनहूँ मन मेरो कर ले प्रेम की बतिया ||
कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971





