दो कदम का साथ
दो कदम का साथ
दो कदम साथ चलने के अंदाज़ में ,
साथ मैं उसके चलता चला ही गया |
उसकी बातों में मैं इस तरह खो गया ||
चन्द लम्हों की उसकी मुलाकात को,
किस तरह से कहूँ उस ख्यालात को ,
बात उसकी मुझे कुछ लगी इस तरह,
उसकी बातों में मैं डूबता ही गया ||
जिसके जुल्मों सितम को दुआ मानकर ,
रात-दिन जिसको दिल में बसाये रखा |
उसने उल्फ़त की दीवार को तोड़कर ,
छोड़ मुझको अकेला चला ही गया ||
कैसे दिल को तसल्ली दें 'आज़ाद' हम ,
अब सहारा नहीं कुछ नज़र आ रहा |
गम छिपाने की कोशिश बहुत की मगर,
जाते-जाते हमें वह रुला ही गया ||

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