Followers

Wednesday, November 27, 2019

जीवन मे उड़ान

जिंदगी की उड़ान छोटी है या बड़ी।
महत्त्वपूर्ण यह नहीं है
पर महत्त्वपूर्ण यह है कि
वह एक उड़ान है।
जो उड़ान भरने वाले की
एक पहचान है।।
जब तक ये जहान है।
शरीर में जान है तब तक ही
जीवन मे उड़ान है।
जान गई, पहचान गई।
आदमी की उड़ान गई।
जितनी ऊँची होगी उड़ान ।
उतना ही वह होगा महान ।
जितने ऊँचे सपने
उतनी ऊँची उड़ान
कर्मठता की यही सही पहचान
लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए
उड़ान की विशेष भूमिका
जैसा लक्ष्य वैसी उड़ान।
बिना लक्ष्य के उड़ान नहीं
और बिना उड़ान के लक्ष्य..... ..।
सपनों की उड़ान कभी भी
बौनी नहीं होनी चाहिए।
लम्बी उड़ान ही हमारी
पहचान होनी चाहिए।
इसी के बल पर सामाजिक प्रतिष्ठा
को स्थान मिलता है
इसलिए- कुछ भी हो
बिना उड़ान के जीवन निरर्थक है
चाहे वह ऊँची हो
अथवा बौनी............।

Tuesday, November 26, 2019

ज़िन्दगी खेल नहीं

ज़िन्दगी खेल तो है नहीं,
खेल क्यों तुम बनाते इसे।
ये तो इक प्यार का गीत है,
क्यों इसे गुनगुनाते नहीं।।

कोई कहता ये एहसास है,
दो दिलों की मधुर प्यास है।
फिर हक़ीक़त से तुम भागते,
प्यास क्यों तुम बुझाते नहीं।।

एक दरिया सा है जिंदगी,
जिसमें अनमोल खुशियाँ भरी,
ज़िन्दगी ऐसा दरिया है तो,
फिर क्यों उसमें नहाते नहीं।।

ज़िन्दगी की है यदि रीति ये
हार के बाद ही जीत है।
फिर तो डर है ये किस बात की,
क्यों हार पर मुस्कराते नही।।

ज़िन्दगी रंजोगम का सफ़र,
कंटकों से भरी इक डगर।
बात सच है अगर आपकी,
कांटों को क्यों हटाते नहीं।।

ज़िन्दगी एक पुस्तक है जो,
जिसमें रंगीन पन्ने जड़े।
घोलकर कुछ सुनहरे से रंग,
क्यों तुम इसको सजाते नहीं।।

ज़िन्दगी एक ऐसा दीया,
ज्ञान का जो उजाला किया।
बनके तुम तेल बाती इसे,
प्यार से क्यों जलाते नहीं।।


राजनीति

राजनीति बन गई है, जोड़-तोड़ का खेल।
जिससे होती दुश्मनी, उसी से करते मेल।।
उसी से करते मेल, तोड़ देते गठबंधन।
अपने स्वारथ हित करते रहते हैं मंचन।।
कहता है 'आज़ाद' दई ये ग़ज़ब की नीति।
तोड़-फोड़ का खेल बन गई है राजनीति।।

जिससे की थी दोस्ती, वह हो गया हैरान।
सब पे पानी फेर दी अब क्या करूँ निदान।।
अब क्या करूँ निदान न कुछ भेजे में आता।
नज़र न सके मिलाय वही है आँख दिखाता।।
कहता है आज़ाद, भिड़ गए टांके उससे।
भाड़ में जाये वो, दोस्ती की थी जिससे।।

एक कुरसी के वास्ते, लगी आबरू दाँव।
कुछ भी अब हो जाय पर, नहीं हटेंगे पाँव।।
नहीं हटेंगे पाँव, सियासत कुछ भी कर लो।
करो खरीद-फरोख्त,जो मनआये वो कर लो।।
कहता है आज़ाद, नज़र में गड़ गई कुरसी ।
ग्राहक दिखत तमाम ,मगर है एक ही कुरसी।।