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Saturday, July 25, 2015

बापू बचपन में शादी

बाल-विवाह कानूनन अपराध है 

 (एक बालिका का निवेदन: अपने पिता से) 

बापू बचपन में शादी जनि रचावा हमरी |
      हो ! रचावा हमरी ,हो! रचावा हमरी||---बापू --

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अबहीं उमर है पढ़न-लिखन की ,भेजा तू स्कूल |
     विद्या ज्ञान से महकी आपन घर आँगन और कूल |
          सोना-चांदी सी जिनिगिया जनि लुटावा हमरी ||---बापू --

शादी ब्याह के  बन्धन में अबहीं ना हमके बाँधा |
     शादी खुशहाली से बढ़कर ना जानी कुछ ज्यादा |
          नाहीं जिनिगिया माटी मा, मिलावा हमरी ||---बापू --

बाल-विवाह सुना हे बापू कानूनन अपराध |
       यहि के चक्कर में परिके हो जइबा तू बरबाद|
           कहते ''आज़ाद '' माना ई कहनवा हमरी ||---बापू                                    



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