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Sunday, July 26, 2015

कर्मवीर

 कर्मवीर 
जो कर्मवीर नर होता है ,
         वह तनिक नहीं पछताता  है |
आँधी और तूफानों में भी ,
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         आगे बढ़ता जाता है |

अपने विवेक अरु भुजबल से ,
         दुष्कर को कर दिखलाता है |
जीवन में आई हलचल से ,
        वह तनिक नहीं घबराता है |

कर्त्तव्य मार्ग से विचलित होना ,
        उसको नहीं सुहाता है |
वह मानव का परम मित्र बन ,
        सब दिल पर छा जाता है |

अपने पौरष के बल पर ही ,
        प्रारब्ध बदल रख देता है |
अपने अदम्य साहस से ही,
        वह शत्रुंजय कहलाता है |

उसके गौरव की गाथा ,
        जन-जन में गाई जाती है |
उसके कीर्ति विजय की महिमा ,
        सर्वत्र सुनाई जाती है |

मातृभूमि हित प्राण गवाना ,
        अपना फ़र्ज समझता है |
प्रेम संदेसा मानवता का ,
        जन-जन तक पहुंचाता है |

अपने श्रम के बल पर ही ,
       पर्वत में राह बनाता है |
सुखी रेती में परीश्रम से ,

       स्वर्णिम पुष्प खिलाता है |

अपने श्रम के पारसमणि से ,
       खुशहाली फैलाता है |
पद-मर्दित आशाओं को ,
       वह हँसकर गले लगाता है |

सागर का अंतस्थल मथकर ,
       वह मोती ले आता है |
विपदाओं में हँसकर जीना ,
       उसके मन को भाता है |

सागर की लहरों से आगे ,
       नाव लिए बढ़ जाता है |
आगे बढ़कर पीछे मुड़ना ,
      उसको नहीं सुहाता है |

जीवन का इक अंग समझ ,
      सुख -दुःख से हाथ मिलाता है |
उसके सम्मुख कायर जुल्मी,
       नत मस्तक ही जाता है |

आगे बढ़ना बढ़ते रहना ,
       के पथ को अपनाता है |
जन-जन को खुशहाली देने 
       का वह लक्ष्य बनाता है |

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