समर्पण
पूज्य माता-पिता के सादर चरणों में समर्पित
पकड़ उँगलियाँ जिनकी मैंने ,
चलना सीखा कदम-कदम |
उन्हें समर्पित करता हूँ मैं ,
अपने मन का काव्यसुमन ||
मुझ पर ममता वारने वाले ,
मेरा सब कुछ तुम्हें समर्पण |
हे ! मेरे तन -मन के पोषक ,
तुम्हें समर्पित 'काव्यसुमन '||
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