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Wednesday, July 29, 2015

मैंने तुम्हारी चाह में

मैंने तुम्हारी चाह में 

मैंने  तुम्हारी   चाह  में   क्या-क्या  नहीं  किया ,
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फिर तुमने मुझको इस तरह से क्यों भुला दिया ||

जिस   दिल   के   आईने   में   तस्वीर  थी   मेरी ,
तुमने  वो  सरे   आम  क्यूँ  सबको  दिखा  दिया ||

मेरे   वास्ते   महफ़िल  में   कभी   रोक  नहीं था ,
किस   वास्ते   तुमने   वहाँ   पहरा   लगा   दिया ||

जब   सिजदे-मिन्नतों   का   कोई   दौर  नहीं  है ,
फिर दिल  के  मंदिरों  में  हमें  क्यों  बसा  लिया ||

माना    की   तुमने   मुझको   धोखा  नहीं  दिया ,
'आज़ाद '  जो    किया  वो  अच्छा   नहीं   किया ||
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