मैंने तुम्हारी चाह में
मैंने तुम्हारी चाह में क्या-क्या नहीं किया ,
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फिर तुमने मुझको इस तरह से क्यों भुला दिया ||
जिस दिल के आईने में तस्वीर थी मेरी ,
तुमने वो सरे आम क्यूँ सबको दिखा दिया ||
मेरे वास्ते महफ़िल में कभी रोक नहीं था ,
किस वास्ते तुमने वहाँ पहरा लगा दिया ||
जब सिजदे-मिन्नतों का कोई दौर नहीं है ,
फिर दिल के मंदिरों में हमें क्यों बसा लिया ||
माना की तुमने मुझको धोखा नहीं दिया ,


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