दलितों के मसीहा
दलितों के मसीहा तुम इक बार चले आओ |
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बेखौफ घूमते हैं कानून के हत्यारे |
कानून के रखवाले फिरते मारे-मारे |
अब उनके लिए कोई कानून बना जाओ ||
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संशोधन के बल पर कानून बनाते हैं |
झूठे कसमें वादों से वे देश चलाते हैं ||
ऐसे नेताओं को कानून सिखा जाओ ||
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दलितों को लुटते हैं वे जाति बना करके |
जनमत हासिल करते वे घर-घर जा करके ||
अब फिर से उन्हें आकर इक बार जगा जाओ ||
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