Followers

Saturday, July 25, 2015

एक पंछी डाल

एक पंछी डाल---------

एक पंछी डाल---------

एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है |
वह तरु की डाल सूना कर गया है ||

       मौन है सारी दिशाएँ, सब परिंदे मौन हैं |
            मौन मारुत की चपलता,आशियाने मौन हैं |
                 दिख रहे चुपचाप जैसे ,उनका कोई खो गया है |
                       एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

पेड़ सूना-सा खड़ा है ,डालियाँ चुपचाप हैं |
     पत्तियां कम्पन रहित हैं , कोंपलें मुरझा गयी हैं |
           भ्रामरी संगीत जैसे भ्रमरों से छिन गया है |
                 एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

       यह तमन्ना सब की है , वह लौट कर आ जायेगा |
      और खुशियों का जखीरा साथ अपने लायेगा |
      पर अभी आया नहीं सूर्यास्त भी तो हो गया है |
      एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

रात गहराने लगी है ,धड़कने बढ़ने लगी है |
           लौटने की आस में अब दूरियां बढ़ने लगी हैं |
                फासला अब और ज्यादा लौटने का हो गया है |
                     एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

तरु खड़ा लाचार बेबस ,शीत अश्रु टपकता है |
      बार -बार उसकी यादों में मचलता तड़पता है |
              सोचता है हे ! विधाता आज ये क्या हो गया है |                  
                    एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|



                        
Add caption

No comments: