एक पंछी डाल---------
एक पंछी डाल---------
एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है |
वह तरु की डाल सूना कर गया है ||
मौन है सारी दिशाएँ, सब परिंदे मौन हैं |
मौन मारुत की चपलता,आशियाने मौन हैं |
दिख रहे चुपचाप जैसे ,उनका कोई खो गया है |
एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|
पेड़ सूना-सा खड़ा है ,डालियाँ चुपचाप हैं |
पत्तियां कम्पन रहित हैं , कोंपलें मुरझा गयी हैं |
भ्रामरी संगीत जैसे भ्रमरों से छिन गया है |
एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|
यह तमन्ना सब की है , वह लौट कर आ जायेगा |
और खुशियों का जखीरा साथ अपने लायेगा |
पर अभी आया नहीं सूर्यास्त भी तो हो गया है |
एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|
रात गहराने लगी है ,धड़कने बढ़ने लगी है |
लौटने की आस में अब दूरियां बढ़ने लगी हैं |
फासला अब और ज्यादा लौटने का हो गया है |
एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|
तरु खड़ा लाचार बेबस ,शीत अश्रु टपकता है |
बार -बार उसकी यादों में मचलता तड़पता है |
सोचता है हे ! विधाता आज ये क्या हो गया है |
एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

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