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Sunday, June 1, 2025

हमसफर

 हमसफ़र बिन सफर है ये कैसा सफर।

जिंदगी  अब  लगे,  जैसे  सूनी  डगर।।


हर कदम  पर  सदा साथ  तुमने दिए।

मुश्किलों में  तुम्हें  साथ  पाए  थे हम।।

अब  पराया  सा  लगता  है  संसार ये।

अब किसे कहके अपना बुलायेंगे हम।।


अब करेगा भला  कौन  मेरी  फिकर।

जिंदगी  अब  लगे,  जैसे  सूनी  डगर।।


एक पल था कि जब तुम मिले थे मुझे।

फूल खुशियों के जीवन में खिलने लगे।।

प्यार  की  रोशनी  ज़िंदगी  को  मिली।

फिर  बहारों  के  सौगात  मिलने  लगे।।


आज जीवन की कश्ती फँसी है भँवर।

जिंदगी  अब  लगे,  जैसे  सूनी  डगर।।


अब  भरोसा  करें किस  जमाने पे हम।

जो  जमाना  किसी  का  हुआ ही नहीं।।

दिल  धड़कता  नहीं  अब तुम्हारे बिना।

और  आँखें  तुम्हें  खोज  थकती  नहीं।।


एक  दीदार  को  बस  तरसती  नज़र।।

जिंदगी  अब  लगे,  जैसे  सूनी  डगर।।


जो वादे किए

 जो  वादे  किए  वो  निभाते  कहाँ  है?

नज़र से  नज़र अब  मिलाते  कहाँ हैं?


ये अपनी  छुपाते  दिखाते  हैं उनकी,

सिवा इसके कुछ इनको आते कहाँ है?


ना जाने  छुपाये हैं क्या राज मन में,

कभी  खुल  के  बातें  बताते कहाँ है?


जो सच की डगर पे हैं चलते अकेले,

भला  शोर  सबसे  मचाते  कहाँ  हैं?


बहुत ढोंग रचते हैं  वे अपनेपन का,

मगर  वक्त पर  काम  आते कहाँ हैं?


जो सच के लिए जाने जाते थे जग में,

वो अब  सच से  पर्दा हटाते कहाँ हैं?


कभी देख के जो चहकते थे हर पल,

वो 'आज़ाद' अब  मुस्कुराते  कहाँ हैं?


Thursday, March 9, 2023

महिला दिवस


 महिला दिवस💐

कब होगी महिला आज़ाद?

          कब  होंगे  सपने आबाद?

भले सृष्टि की संरचना वह,

          पर स्थान है पुरुष के बाद।।


कब तक वो परछाईं बनकर,

          -साथ  फिरेगी  दासी बनकर।

संस्कार के जाल में कब तक

           जुल्म सहेगी मन मसोसकर।।


निज जीने की दिशा मोड़कर,

           सपनों  की  उड़ान  छोड़कर।

जीना पड़ता है क्यों उसको?

           अरमानों का गला घोंटकर।।


सदियों से  ज़ुबान  पर ताला,

            पुरषों ने  ही  सदा  से डाला।

लिंग -भेद  का  दंश  सहा  है,

            असमानता का पीया पियाला। 


क्यों सहना पड़ता है उसको?

            औरों के दुःख दर्द भी उसको।

कहने को देवी का रूप है,

             पर अपमान मिला है उसको।। 


कठपुतली बन क्यों जीएगी?

            गरल ताड़ना क्यों पीएगी ?

जागो महिला अब तो जागो,

           फटी चदरिया तू क्यों सीएगी?


महिला दिवस सार्थक होगा।

          पुरुष साथ जब उसके होगा।

 मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर,

           पुरुष साथ जब उसका देगा।।


महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💐💐


Tuesday, October 19, 2021

मेरी स्वाधीन कलम

 ** मेरी स्वाधीन कलम **

प्रेम, दया, करुणा, ममता-सी,
     साफ, स्वच्छ जैसी  शबनम।
हिय के भाव तराशे हरपल,
      यह  मेरी स्वाधीन कलम।।

गीतों में मधुरस भरती है,
       स्वाभिमान की छवि रखती है।
औषिधि बन पीड़ा हरती है,
       पर्चे पर नुस्खे लिखती है।।

कर्तव्यों की सीख सिखाती,
        अधिकारों की राह दिखाती।
ज्ञान, मान  की सहचरणी बन,
        कोरे कागज में सब कह जाती।।

दुनिया की कोई ताकत ,
       उसके सम्मुख नही टिकती है।
जब चलती स्वाधीन कलम,
        फिर सच की आग उगलती है।।

व्यभिचारी, अत्याचारी को,
          कारागार के मार्ग दिखाती।
जज के हाथों में शोभित हो,
          सत्य पक्ष में न्याय दिलाती।।

यह मेरी  स्वाधीन कलम है,
          शिक्षक, छात्रों की पसंद है।
इनसे है जन्मों का नाता,
          सृष्टि इन्हीं से अक्लमंद है।।

यह अपने मन की सुनती है,
        नही किसी से यह डरती है।।
हो करके आज़ाद हमेशा,
         नव सृजन रचना करती है।।

Wednesday, March 31, 2021

सच्चा योद्धा

 मर मरकर जीने से अच्छा,

              एक बार मरकर जीना।
चाहे छप्पन इंची हो,
              या चाहे छत्तीस का सीना।।

योद्धा डरा नहीं करते हैं,
               गीदड़ के धमकाने से।         
दुश्मन नौ दो ग्यारह होते,
               योद्धा के आ जाने से।।

आत्म प्रशंसा का योद्धा तो,
             खुश होता है  सुन सुनकर।
सच्चा योद्धा वह होता है,
              रण रिपु मारे चुन चुनकर।।

सूर्य नहीं छिपा करता है,
            बादल के छा जाने पर
उसका तेज वही दिखता है,
            बादल के छँट जाने पर।।

योद्धा शिथिल नहीं पड़ता है,
            विपदाओं के आ जाने पर।
लक्ष्य भले कितना मुश्किल हो,
              दम लेता है पा जाने पर।।       

योद्धा मरा नहीं करता है,
            जीता है अपने गुमान पर।
कथा कहानी बन करके वह,
            जीवित रहता हर जुबान पर।।

राम चन्दर आज़ाद
मो.8887732665