कवित्त -1
नेता जी के हाथ जोरि वोट मागने पर प्यारे,
सच कहता हूँ भरोसा मत कीजिए |
बखत चुनाव का है घूमि रहे घर -घर,
समझ बूझि प्यारे मत अपना दीजिए |
ये चुनावी रण है अनेक रणबाकुरे हैं,
सबकी हुँकार व पुकार सुन लीजिये |
कहत ''आजाद'' रोज बदलत पार्टी ये,
आप भी बदलने का पाठ इनसे सीखिए ||
