पञ्च विचार: दोहे
अपने मुख मत कीजिये , अपना ही गुणगान |
कहि ‘आजाद’ इससे नहीं ,कभी बढ़त है मान ||1||
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जल में लाठी मारिये , जल में पड़े न फ़र्क |
ऐसहि जिद्दी लोग से , व्यर्थ करब है तर्क ||2||
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सोच समझ कर लीजिये
, जीवन में संकल्प |
कहीं पितामह भीष्म सम,फिर नहिं बचे विकल्प ||3||
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जीव जनम के संग ही , मौत जनम भी लेय
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जीव संग निसि दिन फिरै, भनक न लागन देय ||4||
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अनुशाशन की रोपनी , घर- परिवार से होय
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विद्यालय में फूल-फलि, एक बिरिछ सम होय ||5||



















