कुछ विचार : जीवन सार
कुछ विचार : जीवन सार
जीवन ऐसा जंग है ,रहता जीवन संग |
जैसे लोहे संग को नहीं छोड़ता जंग ||
वाणी से मधुरस , झरे ,गिरगिट जैसा रंग |
भला चाहते आपनो , त्याग दीजिये संग ||
सत्कर्मो के वास्ते , रहो , सदा तैयार |
चाहे वर्षा ,ग्रीष्म हो,चाहे सरद बयार ||
पीड़ा मत पहुचाइए ,निर्बल जानि के वोहि|
उसकी एकही आहि से,बाख न सकोगे तोहि||
सच्ची बात सराहिये , मेरे मन के मीत |
चाहे केहू अच्छी लगे, चाहे लागै तीत ||
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