नेता और अभिनेता
नेता अभिनेता बने ,मंचन करते रोज
आज यहाँ तो
कल वहां ,नाटक रचते रोज |
नाटक रचते रोज ,रोज की माया शातिर ,
जनता को
गुमराह करें बस वोट के खातिर |
कहता है ‘आजाद’ लोभ लालच भी देता ,
हो गया है बेशर्म
आज नेता अभिनेता ||
नहिं विकास नहिं काज कुछ पंचवर्ष का खेल ,
इस दल से उस
दल चले कर लेते हैं मेल |
कर लेते हैं मेल मात्र कुर्सी के खातिर ,
जनता को
बहकाते कह उस दल को शातिर |
कहता है ‘आजाद’ स्वार्थ के ये सरताज ,
कुर्सी आगे
दीखता नहिं विकास नहिं काज ||
किसको जनता वोट दे यह है कठिन सवाल ,
खड़गसिंह सम
है कोई तो कोई अंगुलिमाल |
कोई अंगुलिमाल बनी राह लेत है रोक ,
कब कोई बुध
आइहैं ,उनको सके जो रोक |
कहता है ‘अजाद’देश की फिकर हो जिसको ,
चुन ले नेता
भला आज यह जनता किसको ?


