जिसे देखो वही यहाँ पर ,
कुछ न कुछ भुनाने में लगा है |
कोई कोई हंसाने में लगा है |
अजी मामला यहीं नहीं थमता ,
कोई-2 तो पहचान बनाने में लगा है ||
उलटे-सीधे बयानबाजी करके ,
कोई तो जनप्रिय हो जाने में लगा है |
यह भी एक जीवन का सच है |
कोई कोई किस्मत आजमाने में लगा है |
ना जाने क्यों कुछ समझ में नहीं आता ,
इसीलिए कोई कोई मुझे समझाने में लगा है ||
दीवार ऊँची है ,चिकनी है फिर भी,
कोई कोई छलांग लगाने में लगा है|
ये कैसा वक्त है ,आदमी स्वयं में मस्त है |
हर कोई अपनी धुन सुनाने में लगा है |
कुछ सुनकर अनसुने कर देते हैं |
ऐसे अन्सुनों को भी सुनाने में लगा है ||
अजीब रिश्ता है सांस का जीवन से ,
जो शाश्वत निभाने में लगा है |
दर्द के लिए दवा तो है मगर ,
फिर भी बेदर्द रूलाने में लगा है |
प्रीति की डोर टूट न जाए कहीं ,
इसीलए वह आँसू बहाने में लगा है ||
ऊँचे-ऊँचे मकान हैं सड़कों के किनारे ,
जिसे आदमी रंग-रोगन से सजाने में लगा है |
जो कल तक खँडहर था वीरान था ,
आज वह मानव स्पर्श से जगमगाने लगा है |
सच कहा है किसी ने कभी घूरे के दिन भी लौटेंगे |
आज के वक्त में आदमी उसे पहचानने लगा है ||


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