किससे कहूँ मैं सखी --------
गुनत धुनत रहती मन भीतर बीतत दिन अरु रातें |
पिय परदेश न भेजत पाती , सपननि मोहिं दिखाते ||
कहु की बातें मन नहिं भावै ,सुनि सुनि कान पिराते |
सूनी सेज नींद नहिं आवै , नयन खुले रह जाते ||
किस किस से मैं नज़र बचाऊं, नैनन तीर चलाते |
पिय 'आजाद' चले अब आओ ,तुम बिन मन अकुलाते ||


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