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Friday, December 4, 2015

जमाने वाले

            ज़माने वाले
तिल सरीखी बात को ताड़ बना देते हैं  ज़माने वाले |
कीचड़ उछालने में तनिक न शरमाते हैं ज़माने वाले ||

लोहा गरम है  चलो हम भी  हथौड़ा  चला देते  हैं |
क्या असर होगा ये फिकर नहीं  करते  ज़माने वाले ||

आपकी बात को तो नज़रअंदाज करना तो आमबात है |
जिसे सुनते हैं बहुत कम मगर सुनाते हैं ज़माने वाले ||

कहीं भूल से  गलती  हो गयी  आपसे तो  ज़रा सोचो |
कोई कोर कसर नहीं रखते खिल्ली उने में जमाने वाले ||

आपकी शोहरत कहीं आपको मुकाम तक न पहुंचा दे |
इसलिए पैर खींचने से बाज नहीं आते हैं ज़माने वाले ||

आपकी  मुस्कराहटों में  इजाफा की  आशंका देखकर |
गम में तबदील करने के बहाने बनाते हैं ज़माने वाले ||

ये कैसे लोग जो  भाई भाई को जुदा करने में माहिर |
और ‘आजाद’ फिर दरियादिली दिखाते हैं ज़माने वाले ||
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