मैंने तुम्हारी चाह में
मैंने तुम्हारी चाह में क्या –क्या नहीं किया |
फिर तुमने मुझको इस तरह से क्यों भुला दिया ||
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जिस दिल
के आइने में
तस्वीर थी मेरी ,
तुमने वो सरेआम
क्यों सबको दिखा दिया ||
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मेरे वास्ते
महफ़िल में कभी रोक नहीं था ,
किस वास्ते
तुमने वहाँ पहरा
लगा दिया ||
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जब सिजदे-
मिन्नतों का कोई दौर
नहीं है ,
फिर दिल के मंदिरों में हमें क्यों बसा लिया ||
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माना कि
तुमने मुझको धोखा नहीं
दिया ,
‘आज़ाद’ जो किया
वो अच्छा नहीं किया ||
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