बुरे बखत कोई काम ना आवै |
जब तक मछरी पानी भीतर सब संग धूम मचावै |
जैसहि जाल बीच है फँसती छोडि सबै भगि जावै ||***********************************
घायल हरिना वन -वन भागै कतहूँ ठौर नहिं पावै |
उसके रकत खुदहि नावक को हरिना तक पहुंचावै ||
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संगी - साथी मारग बदलत बात करत सकुचावै |
कछु कहने से पहले ही वह अपनी बिथा सुनावै ||
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कहीं मदद नहीं माँगहि हमसों मनहिं मनहिं घबरावै |
कहि 'आजाद' ऐसो समया मा मन मिसरी नहिं भावै ||

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