सच्चा कलाकार
आदमी बोले या न
बोले
उसका काम बोलता है
सत्य पर चढ़े रहस्य
के आवरण को
परत दर परत खोलता
है |
लाख कोशिशें कर ले
कोई
उसकी प्रतिभा को
दबाने की
वह दब नहीं सकती
बल्कि
और भी घातक हो जाती
है |
जैसे किसी स्प्रिंग
को
दबाने पर होता है
उल्टा उससे कभी-कभी
भयंकर नुकसान हो
जाता है |
हर आदमी अपने आप
में
एक इनाम होता है |
जिसके कारण उसका
नाम होता है |
गँवाना नहीं चाहता
एक भी पल
सहेजकर रखता है
स्मृतियों के
पन्नों में |
सच्चा कलाकार वह
होता है
जो अपनी कला से
बातें करता है बिन बोले ,
निहारता है अपलक
प्रेम से |
वह सब कुछ सह सकता
है
लेकिन यह
शत-प्रतिशत सच है
वह खुद तबाह हो सकता
है ,
मगर अपनी कला को
तबाह होते नहीं देख सकता है |

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