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Thursday, December 10, 2015

दिल मे उल्फत


दिल में उल्फत ----




दिल में उल्फत पर निगाहों से न भरमाया करो |
सच कहूँ तो इस तरह से  ज़ुल्म  न ढाया करो ||
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लौट कर आता नहीं गुजरा  ज़माना  फिर कभी ,
इसलिए तो  कह  रहा हूँ  वक्त न  जाया करो ||
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दिल को छू  जाता है मेरे आपका मासूम चेहरा ,
आईने  में   देखकर  यूँ   न  शरमाया  करो ||         ************************
जो हकीकत है छिपाने से नहीं  छिपती  कभी ,
चाँद से चेहरे को आँचल में न  छिपाया  करो ||
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                     छा रही काँधे पे जुल्फों की घनी  काली घटाएं ,
      यूँ  हवाओं  में झटक  उनकों न फहराया करो ||
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      भा गई ‘आज़ाद’  कातिल वह लजाने की अदा ,
      सच में पलकों को झुकाकर यूँ न शरमाया करो ||






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