दिल में उल्फत ----
दिल में उल्फत पर निगाहों से न भरमाया करो |
सच कहूँ तो इस तरह से ज़ुल्म न
ढाया करो ||
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लौट कर आता नहीं गुजरा ज़माना फिर
कभी ,
इसलिए तो कह रहा
हूँ वक्त न जाया करो ||
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आईने में
देखकर
यूँ न शरमाया करो || ************************
जो हकीकत है छिपाने से नहीं छिपती कभी
,
चाँद से चेहरे को आँचल में न छिपाया करो
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छा रही काँधे पे जुल्फों की घनी काली घटाएं ,
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भा गई ‘आज़ाद’ कातिल वह लजाने की अदा ,
सच में पलकों को झुकाकर यूँ न शरमाया करो ||




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