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Monday, November 30, 2015

पञ्च विचार: दोहे

पञ्च विचार: दोहे  


पने मुख मत कीजिये , अपना ही गुणगान |
कहि ‘आजाद’ इससे नहीं ,कभी बढ़त है मान ||1||
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ल में लाठी मारिये , जल  में  पड़े न फ़र्क |
ऐसहि जिद्दी लोग से , व्यर्थ  करब  है  तर्क ||2||
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सोच समझ  कर लीजिये , जीवन  में  संकल्प |
कहीं पितामह भीष्म सम,फिर नहिं बचे विकल्प ||3||
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जीव जनम के संग ही , मौत जनम  भी  लेय |
जीव संग निसि दिन फिरै, भनक न लागन देय ||4||
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नुशाशन की रोपनी , घर- परिवार  से  होय |

विद्यालय में फूल-फलि, एक बिरिछ सम होय ||5||




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