बात सच थी ----
बात सच थी मगर कहने में हम सकुचाये |
*************************
उनकी तारीफ़ हमें थोड़ी सी अजीब लगी |
जिन्हें हम फूटी आँखों भी कभी नहीं भाए ||
*************************
जिसने परवाह नहीं की कभी जमाने की |
वो जमाने की सीख देने मेरे घर आये ||
*************************
ये कैसी दोस्ती है जिन्दगी संग साँसों की |
एक के रूठते फिर दूसरी भी चल जाए ||
*************************
जिसने जीवन में दोस्ती की कदर ना जानी |
सच में आजाद दोस्ती की वो कसम खाए ||


No comments:
Post a Comment