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Sunday, November 22, 2015

सत्ताईस नक्षत्र

         
सत्ताईस नक्षत्र 

होवत सत्ताईस नक्षत्र  हिंदी  के  प्रतिमास |
कृतिका  रोहिणी मृगशिरा हर कोई है ख़ास || 
हर कोई है ख़ास आर्द्रा  पुनर्वसु  अरु  पुष्य | 
अश्लेषा मघा की  बरखा  भावै  सबही  मनुष्य || 
कहता है 'आज़ाद' पूर्वाफाल्गुनी कितनी मस्त |
झूमत उत्तराफाल्गुनी संग जब  आवत हस्त  || 

चित्रा  ने चित ले  लियौ  चातक  भयौ उदास |
चातक को अब स्वाति  से बची है थोड़ी आस ||
बची है थोड़ी  आस विशाखा  नहिं   अनुराधा  |
ज्येष्ठा मूल  से  चातक को बस मिलेगी बाँधा || 
कहता    है  'आज़ाद'    आ  गयौ    पूर्वाषाढा  |
वाके   पीछे  आ  धमक्यो  तब   उत्तराषाढ़ा  ||

श्रवण  फुहारन  संग में अंतर्मन  गयो  भीज |
गोरी   गीत   सुनावती  सावन  आयौ  तीज ||
सावन आयौ तीज धनिष्ठा अरु  शतामिषा  |
त्याग  पूर्वाभाद्रपद  दीजिये  मन  से  इर्ष्या  ||
कहता है 'आज़ाद' उत्तराभाद्रपद  की कथनी |
                            कहत रेवती अश्विनी  जस करनी वस् भरणी  ||





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