सत्ताईस नक्षत्र
कृतिका रोहिणी मृगशिरा हर कोई है ख़ास ||
हर कोई है ख़ास आर्द्रा पुनर्वसु अरु पुष्य |
अश्लेषा मघा की बरखा भावै सबही मनुष्य ||
कहता है 'आज़ाद' पूर्वाफाल्गुनी कितनी मस्त |
झूमत उत्तराफाल्गुनी संग जब आवत हस्त ||
चित्रा ने चित ले लियौ चातक भयौ उदास |
चातक को अब स्वाति से बची है थोड़ी आस ||
बची है थोड़ी आस विशाखा नहिं अनुराधा |
ज्येष्ठा मूल से चातक को बस मिलेगी बाँधा ||
कहता है 'आज़ाद' आ गयौ पूर्वाषाढा |
वाके पीछे आ धमक्यो तब उत्तराषाढ़ा ||
गोरी गीत सुनावती सावन आयौ तीज ||
सावन आयौ तीज धनिष्ठा अरु शतामिषा |
त्याग पूर्वाभाद्रपद दीजिये मन से इर्ष्या ||
कहता है 'आज़ाद' उत्तराभाद्रपद की कथनी |
कहत रेवती अश्विनी जस करनी वस् भरणी ||



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