जिन्दगी मौत -----
जिन्दगी मौत का ये सिलसिला
पुराना है ,
एक के
आते
ही दूसरे को जाना
है ||
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रिश्ते और नातों में
हम बंधे हुए तो क्या ,
तोड़ इस बंधन
को एक दिन तो
जाना है ||
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रस्म व
रिवाजों को तोड़ना
बहुत मुश्किल ,
हाल चाहे
जैसे हों हरहाल
में निभाना है ||
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एक अहसास
से ही दिल धड़क उठता
है ,
फिर भी दिल की धड़कन को सीने में दबाना है ||
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उपवनों की शोभा तो
फूल से ही होती
है ,
टूटकर डाली से हार बन जाना है
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मंजिलों को राहों
से दूर कर नहीं सकते
,

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