शाश्वत जीवन
जीवन में कुछ मिल जाए या जीवन से कुछ छीन जाए |
फिर भी जीवन कभी नहीं विश्राम किया करता है ||
वह देखो गिर रहीं पत्तियाँ टूट टूट कर पेड़ों से ,
नंगा पेड़ झुलस रहा है लू के गरम थपेड़ों से |
पतझड़ से जंगल नहीं वीरान हुआ करता है ||
फिर भी जीवन कभी नहीं विश्राम किया करता है ||
नदियाँ शाश्वत बहती रहतीं ,थकती नहीं कभी भी वे |
कल कल करती रहतीं ,रूकती नहीं कभी भी वे ||
उनका प्रबल वेग तो चट्टानों को मोड़ दिया करता है ||
फिर भी जीवन कभी नहीं विश्राम किया करता है ||
रोज रोज दाह से पीड़ित ,फिर भी मना नहीं कर सकता |
धूम्र रूप में आहें तजकर .शांत उसे होना है पड़ता |
फिर भी वह श्मशान देखिये ,कभी नहीं रोया करता है ||
फिर भी जीवन कभी नहीं विश्राम किया करता है ||
बादल उसे भले ही ढँक ले ,कुहरा चाहे चमक रोक ले |
शीत उसे ठिठुरन पैदा कर ,उसके ताप भले कम कर दे |
फिर भी रवि के उदय अस्त पर फर्क नहीं पड़ा करता है ||
फिर भी जीवन कभी नहीं विश्राम किया करता है ||
लाख लांछन आरोपित हों ,वह उनकी परवाह न करता |
अपने सत्कर्मो के बल पर , वह प्रतिपल आगे को बढ़ता |
वह सत्पथ पर चलने से, कभी नहीं डरा करता है ||
फिर भी जीवन कभी नहीं विश्राम किया करता है ||


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