आखिर कब तक.........
कब तलक रोती रहेंगी सरहदें आखिर हमारी |
अब तो इसके वास्ते इंतजाम होना चाहिए ||
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अब तो दुश्मन में नहीं शायद बची इंसानियत,
उसके माफिक अब कोई पैगाम होना चाहिए ||
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कब तलक रोएँगी माँएं और बहने, बेटियाँ ,
कोई पुख्ता
इसका एहतमाल होना चाहिए ||
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कब तलक खोते रहेंगे अपने नौजवानों को हम,
इस की चर्चा
अब तो सरेआम होना चाहिए ||
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शर्म आती है नहीं उन्हें अपने धूर्त कारनामों पर,
अब तो सच ‘आज़ाद’ कोई कुहराम होना चाहिए ||


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