सखि, मन मेरो स्थिर.........
सखि, मन मेरो स्थिर
नाहीं |
पिया प्रेम में भयौ दिवानो, बसत है उनकी ठाहीं |
भ्रमर रूप धरि चहुँदिश भटकत,पास
टिकट है नाहीं |
सोचि-सोचि कर कबहूँ हँसूं तो
छन उदास होई जाहीं |
नैननि सो भयौ नींद नदारद मन
कछु समझत नाहीं |
बिसरावन की लाख जुगति करि सपनन
परत दिखाहीं |
मन ‘आजाद’ पिया के बस में करी
सकती कछु नाहीं ||
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