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Wednesday, January 6, 2016

हे भारत के शेरे वीर

                   हे भारत के शेरे वीर !!!


जंग लग गए अस्त्र-शस्त्र में ,
          मंद पड़ गयी क्या शमसीर ?
कब तक मौन   रहोगे प्रहरी ,
          भारत अब हो रहा   अधीर ||

जुल्मिस्तान के जुल्म सहोगे ,
         और रखोगे  कब  तक  धीर ,
गर्व चूर कर दो अब उसका ,
          हे    भारत   के   शेरे  वीर !!

ना जाने   इतराय   रहा क्यूँ ,
         फुदक रहा   मेढक   के जैसे ,
अब तो सबक सिखाना होगा ,
          ऐसे    वैसे    चाहे    जैसे ||

कायरता  से  बाज  न  आता ,
         छिप-छिपकर वह शोर मचाता ,
मगर   सामने   आने  से  वह ,
         गीदड़ सम छिपता  कतराता ||

उसे दिखा दो उसकी सूरत ,
         ऐ  भारत  के  सिंह   सपूत |
कभी न फिर पीछे मुड़ देखे ,
         वह कायर और जुल्मी धूर्त ||

कवि -राम चंदर 'आजाद'
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
जिला- झालावाड़ (राज.)



            

    

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