चल सजनी उस देश
चल सजनी उस देश......
चल सजनी उस देश ,
जहाँ तेरो प्रीतम रहते |
बहुत दिनन से खबर न
आई नहिं पाती सन्देश |
ना जाने किस हाल में होंगे मन में उठत क्लेश |
तन मन को कछु नीक न लागै साँस बची बस शेष |
रात न बीतत दिन नहिं आवत भावत नहिं परिवेश |
प्रीतम गेह दूर अति
हौवे नहिं कोई संग विशेष |
तम का मार्ग कंटकमय
जहाँ ऐसो प्रीतम का देश |
मन आज़ाद मिलनों को चाहे बिनु किए इक छन लेश ||
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