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Monday, August 31, 2015

ढोंग और पाखंड ---

ढोंग और पाखंड ---


ढोंग और पाखंड की ऐसी रची कुचाल |
पिसे मसाले बिक गए सील पड़ी बदहाल ||
सील पड़ी बदहाल की उसमे माता प्रगटीं|
पीसन में तन जावेगी माता की भृकुटी ||
कहता है आज़ाद बावरे जग के लोग |
जिन्हें नचावत बन्दर के सम फैला ढोंग ||

मोबाईल से हो गयौ खूब प्रसार-प्रचार |
माता के प्रकोप से हो जाओ हुशियार ||
हो जाओ हुशियार जतन कुछ ऐसा कर लो |
सिल-बट्टे को छोड़ मसाले पीसे ले लो ||
कहता है आज़ाद भीड़ बनिया घर धाईल|
आपस में बतियात हाथ में लिए मोबाइल ||

मंदिर में लड्डू चढें और चढ़ावें भोग |
हे माता रक्षा करो तुम हो सिरजनहार ||
तुम हो सिरजनहार हमारी विनती इतनी |
तुझे मिलेंगे भोग चढ़ावा समरथ जितनी ||
सुनी आज़ाद पुजारी मन फूटे लड्डू |
माता कृपा हेतु चढें मंदिर में लड्डू ||


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