तुम्हे समर्पित
ऐ मेरी प्यारी रचनाओं जाओ। जाओ ॥ जाओ॥
लोकार्पित कर दिया तुम्हें अब सबके मन को भाओ॥ ऐ मेरी ---
अब तक मेरे मन मंदिर में तुमने जगह बनाई।
मेरे ही हाथों सजधज कर मेरे मन को लुभाई ।
अब औरों के कर कमलों में अपनी जगह बनाओ ॥ ऐ मेरी ---
मेरे मन के कोमल पन्नों में ,तुमने आकार लिया ।
तुमने मुझसे प्यार किया और मैंने तुमसे प्यार किया ।
अब औरों के ह्रदय पटल पर अपनी छाप बनाओ ॥ ऐ मेरी ---
आज मेरा मन मुदित हो रहा तू जन -जन तक जाएगी ।
होकर के 'आज़ाद' सुमन की खुशबू तू फैलाएगी ।
अब लोगों के मधुर अधर बन हँसो और मुस्काओ ॥ ऐ मेरी ---
लोकार्पित कर दिया तुम्हें अब सबके मन को भाओ॥ ऐ मेरी ---
अब तक मेरे मन मंदिर में तुमने जगह बनाई।
मेरे ही हाथों सजधज कर मेरे मन को लुभाई ।
अब औरों के कर कमलों में अपनी जगह बनाओ ॥ ऐ मेरी ---
मेरे मन के कोमल पन्नों में ,तुमने आकार लिया ।
तुमने मुझसे प्यार किया और मैंने तुमसे प्यार किया ।
अब औरों के ह्रदय पटल पर अपनी छाप बनाओ ॥ ऐ मेरी ---
आज मेरा मन मुदित हो रहा तू जन -जन तक जाएगी ।
होकर के 'आज़ाद' सुमन की खुशबू तू फैलाएगी ।
अब लोगों के मधुर अधर बन हँसो और मुस्काओ ॥ ऐ मेरी ---

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