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Wednesday, August 5, 2015

वास्तविकता

वास्तविकता 

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अपनी बात सुनाने वालों ,
            औरों की नहीं सुनने वालों !
लाख करो पर सच्चाई से ,
            तुम मुह मोड़ नहीं सकते |
लाख दलीलें देने से तुम ,
             हरिश्चंद नहीं बन सकते ||

चाटुकारिता की कुंजी से ,
             कर्मठ ताले कभी न खुलते |
नजरें नीचीं कर लेने से ,
             पाप कभी नहीं यों धुलते |
औरों को अपमानित कर तुम ,
            श्रेष्ठ  कभी नहीं बन सकते ||

चिल्लाने से कभी नहीं अब ,
            काम तुम्हारा बनने वाला |
रँगे भेड़िये बनने से  अब ,
             सत्य नहीं है छिपने  वाला |
गीदड़ धमकी से तुम प्यारे ,
             बर्बर शेर नहीं बन सकते ||

कोरे धमकी से प्यारे अब ,
            कोई नहीं है डरने वाला |
युध क्षेत्र में शत्रु समक्षे ,
            वीरता का दे रहे हवाला |
डींग मारने से तुम प्यारे ,
            अफलातून नहीं बन सकते ||

रोज-रोज उपदेश सुनाकर ,
             धर्मजाल में उन्हें फंसाकर ,
मीठी बोली बोल-बोलकर,
             धर्मगीत की पंक्ति सुनाकर ,
वल्कल धारण कर लेने से ,
             धर्मराज नहीं बन सकते ||

हाँ में हाँ मिलाने वाले ,
              अपनी नहीं सुनाने वाले ,
दूजे के संकेतों भर से ,
              सच्ची बात छिपाने वाले ,
पिछलग्गू  रहकर प्यारे तुम ,
              नेता कभी नहीं बन सकते ||

नैन मटक्का करने वाले ,
             फ़िल्मी गीत सुनाने वाले ,
धौंस सुनी तो नौ दो ग्यारह ,
            संग-संग  जीने -मरने वाले |
प्रेम स्वांग करने से प्यारे ,
            मंजनू कभी नहीं बन सकते ||

बिना बात के हंसने वाले ,


            बिना बात के रोने वाले ,
हर कोई के सम्मुख ही ,
            अपना दुखड़ा रोने वाले ,
हे ! 'आज़ाद' कभी ऐसे जन ,
            जन आदर्श नहीं बन सकते ||

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