वास्तविकता
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अपनी बात सुनाने वालों ,
औरों की नहीं सुनने वालों !
लाख करो पर सच्चाई से ,
तुम मुह मोड़ नहीं सकते |
लाख दलीलें देने से तुम ,
हरिश्चंद नहीं बन सकते ||
औरों की नहीं सुनने वालों !
लाख करो पर सच्चाई से ,
तुम मुह मोड़ नहीं सकते |
लाख दलीलें देने से तुम ,
हरिश्चंद नहीं बन सकते ||
चाटुकारिता की कुंजी से ,
कर्मठ ताले कभी न खुलते |
नजरें नीचीं कर लेने से ,
पाप कभी नहीं यों धुलते |
औरों को अपमानित कर तुम ,
श्रेष्ठ कभी नहीं बन सकते ||
चिल्लाने से कभी नहीं अब ,
काम तुम्हारा बनने वाला |
रँगे भेड़िये बनने से अब ,
सत्य नहीं है छिपने वाला |
गीदड़ धमकी से तुम प्यारे ,
बर्बर शेर नहीं बन सकते ||
कोरे धमकी से प्यारे अब ,
कोई नहीं है डरने वाला |
युध क्षेत्र में शत्रु समक्षे ,
वीरता का दे रहे हवाला |
डींग मारने से तुम प्यारे ,
अफलातून नहीं बन सकते ||
रोज-रोज उपदेश सुनाकर ,
धर्मजाल में उन्हें फंसाकर ,
मीठी बोली बोल-बोलकर,
धर्मगीत की पंक्ति सुनाकर ,
वल्कल धारण कर लेने से ,
धर्मराज नहीं बन सकते ||
हाँ में हाँ मिलाने वाले ,
अपनी नहीं सुनाने वाले ,
दूजे के संकेतों भर से ,
सच्ची बात छिपाने वाले ,
पिछलग्गू रहकर प्यारे तुम ,
नेता कभी नहीं बन सकते ||
नैन मटक्का करने वाले ,
फ़िल्मी गीत सुनाने वाले ,
धौंस सुनी तो नौ दो ग्यारह ,
संग-संग जीने -मरने वाले |
प्रेम स्वांग करने से प्यारे ,
मंजनू कभी नहीं बन सकते ||
बिना बात के हंसने वाले ,
बिना बात के रोने वाले ,
हर कोई के सम्मुख ही ,
अपना दुखड़ा रोने वाले ,
हे ! 'आज़ाद' कभी ऐसे जन ,
जन आदर्श नहीं बन सकते ||


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