चमचागीरी
आप ने सीखी सदा ही चमचागीरी ,
काम करना आप ने सीखा नहीं ही ,
नौकरी में काम जबकि है जरुरी ||
अपने मुँह मिया आप ही मिटठू बनने से ,
नहीं चलेगा काम बिना कुछ करने से |
चमचेपन से नहीं काम अब होने वाला ,
प्रियवर! काम बनेगा स्वयं सुधरने से ||
काम नहीं सीखा ,सीखी है चमचागिरी ,
सो डरके करना काम तुम्हारी है मजबूरी |
कब तक डरकर काम करोगे मेरे प्यारे ,
उसे दिखा दो अपने अन्दर की कस्तूरी ||
चमचे बनकर कब तक उसके साथ फिरोगे ,
कब तक उसकी मनमानी को सहन करोगे |
क्या गँवा दिया पुरुषत्व आपने उसकी हाँ में ,
फिर समाज में कैसे मुख दिखला पाओगे ||
कर्मठता की सदा कदर है होती आई ,
उसने संकट में भी हार नहीं है खाई |
सो कर्मशरण में मेरे प्रियवर आ जाओ ,
कर्मशील की पूजी जाती है परछाईं ||


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