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Thursday, October 8, 2015

कौल के वास्ते


                                 कौल के वास्ते


कौल के वास्ते जाँ निछावर करें ,
         आजकल इस तरह के कहाँ लोग हैं ?
कहने को हम तुम्हारे घणी यार हैं ,
         वक्त पर काम आते कहाँ लोग हैं ?
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धर्म से धर्म लड़ते ये कैसा धरम ,
         धर्म को धर्म कहने में आती शरम,
जिस धरम से किसी का भला हो अगर ,
         आजकल उस धरम पर कहाँ लोग हैं ?
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प्यार में कसमे वादे तो ऐसे किये,
         जैसे जन्मों जनम तक न टूटेगा ये ,
एक झोंका जिसे तोड़कर चल दिया ,
         आज रिश्ते निभाते कहाँ लोग हैं ?

 इक घरोंदा बनाया था जो प्यार का ,
         प्यार के रंग में जिसको था हमने रंगा,
आग नफरत की उसमे लगी इस कदर ,
         आग ऐसी  बुझाते कहाँ लोग हैं ?
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मुझको मालूम नहीं कब मेरे हो गए ?
         उनको मालूम नहीं कब मैं उनका हुआ ?
जिसमे वादे कसम की जगह भी नहीं , 
         आज 'आज़ाद ' ऐसे कहाँ लोग हैं ?
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