आदमी देखो पुराना हो गया है
आदमी देखो पुराना हो गया है |
फिर भी कहता देखिये-
मौसम सुहाना हो गया है ||
इन्द्रियों में है नहीं दम
बात करने में नहीं कम ,
खिलखिलाते मजनुओं को देखकर
कह रहा कैसा जमाना हो गया है ||
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तौलता है समय के पलड़े में रखकर
कुछ पुरानी और कुछ नव संस्कृतियाँ
और फिर कहने लगा कि-
दिल दीवाना हो गया है ||
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शर्म अब बेशर्म कि चादर लपेटे
फिर रही बिंदास होकर देखिये
और उनके पीछे हैं वो भेड़िये
शर्म और बेशर्म दोनों से अपरचित
कह रहे दुनिया बेगाना हो गया है||
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दूर से देखा लगा कोई कली है
जो किसी रंगीन हाथों से पली है
माल अच्छा है समझकर वो गए
पर वो मायूस हो कहने लगे-
माल यह काफी पुराना हो गया है||
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औरों कि सुनने से पहले अपनी बातें
कहने लगता है चाहे दिन हो या रातें
दर्द पुराने या कि नए-नए हों
ऐसा रोया -रोया कहता -
मानो उसका कोई खजाना खो गया है ||
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