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Saturday, October 24, 2015

आदमी देखो पुराना हो गया है


        

        
      आदमी देखो पुराना हो गया है 

आदमी देखो पुराना हो गया है |
फिर भी कहता देखिये-
मौसम सुहाना हो गया है ||
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इन्द्रियों में है नहीं दम 
बात करने में नहीं कम ,
खिलखिलाते मजनुओं को देखकर 
कह रहा कैसा जमाना हो गया है ||
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तौलता है समय के पलड़े में रखकर 
कुछ पुरानी और कुछ नव संस्कृतियाँ 
और फिर कहने लगा कि-
दिल दीवाना हो गया है || 
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शर्म अब बेशर्म कि चादर लपेटे 
फिर रही बिंदास होकर देखिये 
और उनके पीछे हैं वो भेड़िये
शर्म और बेशर्म दोनों से अपरचित 
कह रहे दुनिया बेगाना हो गया है||      
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दूर से देखा लगा कोई कली है 
जो किसी रंगीन हाथों से पली है 
माल अच्छा है समझकर वो गए 
पर वो मायूस हो कहने लगे- 
माल यह काफी पुराना हो गया है|| 
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औरों कि सुनने से पहले अपनी बातें 
कहने लगता है चाहे दिन हो या रातें 
दर्द पुराने या कि नए-नए हों 
ऐसा रोया -रोया कहता -
मानो उसका कोई खजाना खो गया है ||
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