मेरो पिय परदेश सिधारे |
मेरो पिय परदेश सिधारे |
ढूरकत अँसुवन धारे||
खान-पान रंचहु नहीं भावे,
आवत याद तिहारे ||
काम काज में मन नहिं लागै,
संध्या और सकारे ||
रात-रात भर नींद न आवै ,
हो जावत भिनसारे ||
मन तन छोरि सकल जग नाचै,
रहत न पास हमारे ||
नहिं 'आजाद' मनहिं कछु भावै,
जगत लगत न पियारे ||


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