कहने को एक पल में .......
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कहने को एक पल में बन जाते सारे साथी ,
पर साथ देने वाले होते हैं कोई कोई ॥1॥
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छाये हैं आसमां में बादल जो काले काले,
जल बनके बरसते हैं वे मेघ कोई कोई ॥2॥
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रणभूमि में होते हैं जाने तमाम लोग ,
पर उनमें शूरमा तो होते हैं कोई कोई ॥3॥
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है जान मेरी हाज़िर तेरे वास्ते हरपल ,
पर जान देने वाले होते हैं कोई कोई ॥4॥
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रोटी तो खा रहे हैं छोटे -बड़े सभी ,
मेहनत के बल पे रोटी खाते हैं कोई कोई ॥5॥
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कहने को ये भी वो भी सब दोस्त हैं मेरे ,
पर दोस्ती के रिश्ते निभाते हैं कोई कोई ॥6॥
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कविता सुना रहे हैं कविगण यहाँ सभी ,
'आजाद' मगर उनको सुनते हैं कोई कोई ॥7॥


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