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Tuesday, October 13, 2015

आज़ाद के चौकड़े



      आज़ाद के चौकड़े

गुरु से कपट ,मातु-पितु चोरी ,
    अरु  ऊपर  से सीना जोरी |नहिं आजाद पावहिं जग ठौर ,
    चाहे  छोरा  या  हो  छोरी ||
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गुरु से ज्ञान ,मातु से ममता ,
    अरु भाई से भुजबल क्षमता |
कहि 'आजाद' पितु से निर्भयता ,
    पत्नी से सृजन की क्षमता ||
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मन से बैर उपरि से खैर ,
    वा से बढ़िया समझहु गैर |
कहि 'आजाद' निश्छल मोहिं भावै,
    चाहे आपुन  या  हो गैर ||
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धन बिनु धनी ,ज्ञान बिनु ज्ञानी ,
    जस चमकत मटकी बिनु पानी |
कहि 'आजाद' ऐसहि जन जग में ,
    जानि  बूझि  करते  नादानी ||
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सूरज दिवस ,चन्द्र से रजनी ,
    जीवन खेल चले नित धरनी |
कहि 'आजाद' जो होहि महाजन ,
    फरक न उनके कथनी करनी ||

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