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Monday, August 31, 2015

ढोंग और पाखंड ---

ढोंग और पाखंड ---


ढोंग और पाखंड की ऐसी रची कुचाल |
पिसे मसाले बिक गए सील पड़ी बदहाल ||
सील पड़ी बदहाल की उसमे माता प्रगटीं|
पीसन में तन जावेगी माता की भृकुटी ||
कहता है आज़ाद बावरे जग के लोग |
जिन्हें नचावत बन्दर के सम फैला ढोंग ||

मोबाईल से हो गयौ खूब प्रसार-प्रचार |
माता के प्रकोप से हो जाओ हुशियार ||
हो जाओ हुशियार जतन कुछ ऐसा कर लो |
सिल-बट्टे को छोड़ मसाले पीसे ले लो ||
कहता है आज़ाद भीड़ बनिया घर धाईल|
आपस में बतियात हाथ में लिए मोबाइल ||

मंदिर में लड्डू चढें और चढ़ावें भोग |
हे माता रक्षा करो तुम हो सिरजनहार ||
तुम हो सिरजनहार हमारी विनती इतनी |
तुझे मिलेंगे भोग चढ़ावा समरथ जितनी ||
सुनी आज़ाद पुजारी मन फूटे लड्डू |
माता कृपा हेतु चढें मंदिर में लड्डू ||


Sunday, August 23, 2015

चमचागीरी

चमचागीरी

आप ने सीखी सदा ही चमचागीरी ,
सिर झुकाकर सर्वदा की जी हजूरी |
काम करना आप ने सीखा नहीं ही ,
नौकरी में काम जबकि है जरुरी ||

अपने मुँह मिया आप ही मिटठू बनने से ,
नहीं चलेगा काम बिना कुछ करने से |
चमचेपन से नहीं काम अब होने वाला ,
प्रियवर! काम बनेगा स्वयं सुधरने से ||

काम नहीं सीखा ,सीखी है चमचागिरी ,
सो डरके करना काम तुम्हारी है मजबूरी |
कब तक डरकर काम करोगे मेरे प्यारे ,
उसे दिखा दो अपने अन्दर की कस्तूरी ||

चमचे बनकर कब तक उसके साथ फिरोगे ,
कब तक उसकी मनमानी को सहन करोगे |
क्या गँवा दिया पुरुषत्व आपने उसकी हाँ में ,
फिर समाज में कैसे मुख दिखला पाओगे ||

कर्मठता की सदा कदर है होती आई ,
उसने संकट में भी हार नहीं है खाई |
सो कर्मशरण में मेरे प्रियवर आ जाओ ,
कर्मशील की पूजी जाती है परछाईं ||






Friday, August 21, 2015

दिल में है दर्द --------

एक गीत :दिल में है दर्द --------

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दिल में है दर्द मगर फिर भी मुस्कराता हूँ |
याद  आने  पर  कोई  गीत  गुनगुनाता हूँ ||

लोग हँसतें हैं  आजकल  मेरी  तन्हाई पर,
बड़ी मुश्किल से वक्त अपना मैं बिताता हूँ ||

दिन तो कट जाते हैं पर रात गुजरती ही नहीं ,
फिर भी कुछ सोच के करवट बदलता जाता हूँ ||

आइना  आज  न  जाने क्यूँ घूरता है मुझे ,
अपनी तस्वीर से ही चिढ़ता चला जाता हूँ ||

मुझको 'आज़ाद 'नहीं भूल पाएंगे वो कभी ,
क्योंकि मैं स्वप्न में उनको करीब पाता हूँ ||

Sunday, August 16, 2015

एक गीत : आपके लिए


एक गीत : आपके लिए


दर्द अपने चाहते हो यदि छिपाना |

सबसे पहले सीखिए तुम मुस्कराना ||

आइना जैसे था वैसे आज भी है |
हो गया है तो ये चेहरा पुराना ||

आपने अपने को ही जाना न समझा ,
बस यही कहते रहे दुश्मन जमाना ||

दर्द आँखों में तुम्हारे दिख रहा है |
और करते आप हँसने का बहाना ||

जिन्दगी तन्हां नहीं कट पाएगी |
दोस्त तुमको तो पड़ेगा ही बनाना |

चाहते आज़ाद तुम गम को भागना ,
गीत कोई सीखिए तुम गुनगुनाना ||




Saturday, August 15, 2015

जरा सोचिए

जरा सोचिए



छोड़ गए जो समय रेत पर पद-चिह्नों की अनुपम छाप |
क्या कुछ कदम चले हम उस पर जरा सोचिए अपने आप ?

बीत गया इक लम्बा अरसा फिर मन में क्यों छाया दर-सा ?
जब यह खही पट जाएगी तब सचमुच आज़ाद हैं आप ||
आज़ादी के इस अवसर जश्न मनाते करते जलसा ||
खादी  की  पोशाक  पहन ली वाणी पर अंग्रेजी छाप ||

मनोकामना  उन वीरों की जिसने देखा था इक सपना ,
शोषण ,संशय ,संताप परे प्यारा भारत होगा अपना ||
क्या उनके स्वप्निल भारत की चर्चा कभी किये है आप ?

धर्म, जाति ,सम्प्रायवाद की नीति चला रखी है हमने |
आतंकी माहौल बनाकर लूट मचा रखी है हमने ||
गुंडे और बदमाश लुटेरे शासन की रचते परिमाप ||

अपनी कुर्सी रहे सलामत भले देश पर आये आफत |
कड़ी सुरखा बीच तिरंगा फहराए यह कैसी चाहत ?
संसद में आतंकी हमले कहीं न हों जाए चुपचाप ||

हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई कहने को हम भाई-भाई |
धर्मवाद ,सम्प्रायवाद फिर क्यों इतनी गहरी खाई ?|






            

Wednesday, August 12, 2015

तुम्हें समर्पित

          तुम्हे समर्पित   
ऐ मेरी प्यारी रचनाओं जाओ। जाओ ॥ जाओ॥ 
लोकार्पित कर दिया तुम्हें अब सबके मन को भाओ॥  ऐ मेरी ---

अब तक मेरे मन मंदिर में तुमने जगह बनाई। 
मेरे ही हाथों सजधज कर मेरे मन को लुभाई । 
अब औरों के कर कमलों में अपनी जगह बनाओ ॥ ऐ मेरी ---

मेरे मन के कोमल पन्नों में ,तुमने आकार लिया । 
तुमने मुझसे प्यार किया और मैंने तुमसे प्यार किया । 
अब औरों के ह्रदय पटल पर अपनी छाप बनाओ ॥ ऐ मेरी ---

आज मेरा मन मुदित हो रहा तू जन -जन तक जाएगी । 
होकर के 'आज़ाद' सुमन की खुशबू तू फैलाएगी । 
अब लोगों के मधुर अधर बन हँसो और मुस्काओ ॥ ऐ मेरी ---

         

Tuesday, August 11, 2015

देकर सहारा

देकर सहारा ------

देकर सहारा प्यार का ,तूने भुला दिया |
दिल लूट करके तूने मुझको दगा दिया ||

अब जा रहा हूँ दूर ,वफाओं के शहर में ,
क्योंकि किसी ने पास में मुझको बुला लिया ||

अब फिर नहीं मिलूँगा तुझसे वो मेरी जाँ,
क्योंकि खुदा ने पास में मुझको बुला लिया ||

बेकार आंसुओं की बरसात कर रही हो |
आज़ाद जब कफ़न का छाता लगा लिया ||