मजहबी राह से ......
मजहबी राह से गुमराह होकर
ऐसा है लगता |
देश अपना है फिर भी जाने क्यूँ अपना नहीं लगता ||
चलो
इक बार हम भी देश के होकर दे तो देखें |
सोच
लोगों की बदलते हुए पल भर नहीं
लगता ||
दूर
रखकर सियासत से धरम को आजमाएं
हम |
धर्म
को धर्म से मिलते हुए पल भर नहीं लगता ||
सभी इंसान अपने कर्म और
ईमान पर यदि हों |
फिर
तो इंसानियत को फैलते पल भर नहीं लगता ||
गले अपनों को न लगाएं
तो नज़रों से न गिरने दें |
अपने
जो हैं पराये बनने में पल भर नहीं लगता ||
कोई
मजहब नहीं हो सकता मेरे मुल्क से बढ़कर |
ऐसे
मजहब को मिटने में कभी पल भर नहीं लगता ||
देश
में हम नहीं बसते देश हम सब में बसता है |
सुनो
‘आजाद’ ऐसे मुल्क को कोई छू नहीं सकता ||
कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971






