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Sunday, February 28, 2016

मन पंछी उड़ि चलियो ,



   

मन पंछी उड़ि चलियो ,

मन पंछी उड़ि चलियो ,
जहाँ हो चैन की बगिया |

रकम-रकम के बिरवा हों जहाँ मलय पवन की छहिंया |
द्वेष –प्रेम दोउ गले मिलत हों बन जीवन की पहिया ||

राग रंग के पुष्प  खिले हों भ्रमर  भुलत जहाँ रहिया |
मस्त लुभावन मन को भावन टेरत  सुर जहाँ पपिहा ||

मधुर मनोहर पिक सुरसरिता बहती बिनु छन रुकिया |
हर दरख़्त  जहाँ झूम  झूमकर फाग  सुनावत रसिया ||

पादपपुष्प  झूमत  मस्ती से  करत  संग अठखेलियाँ |
कहत ‘आजाद’ सुनहूँ मन मेरो कर ले प्रेम की बतिया ||

कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)

मोबाईल- 9414750971 



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