चलो सजन कहिं और
चलो सजन कहिं और
जहाँ हो प्रेम की नगरी |
प्रेम धरा के कण- कण में हो नभ में प्रेम की बदरी ||
प्रेम की भाषा प्रेम
की आशा प्रेम सुधा रस गगरी ||
प्रेम पियासा जन अभिलाषा मुख में प्रेम की मिसरी ||
प्रेम विटप पर प्रेम
के पंछी छेड़त प्रेम की ठुमरी ||
प्रेम छवी नैनन दर्शाती खोलत अधर प्रेम की गठरी ||
कहि ‘आजाद’ मनहिं भीतर में तेरो है प्रेम की नगरी ||

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