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Thursday, February 25, 2016

एक विचार जीवन सार

                एक विचार: जीवन सार  


कहि आजाद जब दुखित मन,माँगहु हंसी उधार |
      इससे पुनि खिल जाएगा, खुशियों का संसार ||1||

कहि आजाद न अस गिरौ, नज़र न सकौ मिलाय |
       गिरना है तो असि गिरहु, सब तोहिं लेहिं उठाय ||2||
     
चिंता की सँकरी गली ,जो कोई घुसि जाय |
      कहि आजाद बिरला कोई ,वापस फिर आ पाय ||3||
      
 अपनी सुनि तारीफ़ मैं ,फूला नहीं समाय |
      सुनि आजाद जब और की ,मुझसे रहा न जाय ||4|| 
     
मुझसे लई आपन  कहत , मोको रह्या दिखाय |
      कहि आजाद असि लोग से बचि के रहियो भाय ||5||
     
 पर सोना पीतल कहै ,निज पीतल को स्वर्ण |
      पड्यौ जौहरी सामने ,धूमिल हो गयौ वर्ण ||6|| 

कवि एवं साहित्यकार –रामचंदर आजाद
जवाहर नवोदय विद्यालय झालावाड़ (राज.)
मोबा.9982395653

       

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