एक विचार: जीवन सार
कहि आजाद जब दुखित मन,माँगहु हंसी उधार |
इससे पुनि खिल
जाएगा, खुशियों का संसार ||1||
कहि आजाद न अस गिरौ, नज़र न सकौ मिलाय |
गिरना है तो असि गिरहु, सब तोहिं लेहिं उठाय
||2||
चिंता की सँकरी गली ,जो कोई घुसि जाय |
कहि आजाद
बिरला कोई ,वापस फिर आ पाय ||3||
अपनी सुनि तारीफ़
मैं ,फूला नहीं समाय |
सुनि आजाद जब
और की ,मुझसे रहा न जाय ||4||
मुझसे लई आपन कहत ,
मोको रह्या दिखाय |
कहि आजाद असि
लोग से बचि के रहियो भाय ||5||
पर सोना पीतल कहै ,निज पीतल को स्वर्ण |
पड्यौ जौहरी
सामने ,धूमिल हो गयौ वर्ण ||6||
कवि एवं साहित्यकार –रामचंदर आजाद
जवाहर नवोदय विद्यालय झालावाड़ (राज.)
मोबा.9982395653

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