Followers

Wednesday, March 2, 2016

देशप्रेम और देशद्रोह



          देशप्रेम और देशद्रोह
  देशप्रेम और देशद्रोह ये कहने की कोई बात नहीं |
  ये किस दिल में कब आ जाए यह भी किसी को ज्ञात नहीं ||
  परिवर्तन के नव उमंग में मुख से कोई क्या कह दे |
  राजनीति के नज़रों से इसे देखना कोई बात नहीं ||

  देशद्रोह और देशप्रेम पर राजनीति जो करता है |
  ऐसा नेता कभी देश का भला नहीं कर सकता है ||
  अपने स्वारथ के खातिर कुछ ऐसे चर्चे यदि होंगे ,
  भला बताओ सच्चाई को कौन बयाँ कर सकता है ?

  देशद्रोह की परिभाषा यदि नारों से तय होती है |
  फिर देशप्रेम के नारों पर क्यों राजनीति नहिं होती है ?
  सरहद पर सैनिक मरते हैं फिर नेता चुप क्यों रहते हैं ?
  दो शब्द शोक के कहने से क्या देशप्रेम हो जाता है ?

  उस माँ से पूछो जिसके आँखों का तारा छिनता है |
  उस माँ के आँखों में क्या देशप्रेम नहीं दिखता है ?
  राजनीति से दूर रखो इस देशद्रोह के नारों को ,
  औरों को देशद्रोह कहने से देशप्रेम नहीं बढ़ता है ||

  कानून और धाराओं से यदि देशद्रोह को हम मापें |
  तो देशप्रेम को भी कोई कानून व धारा में जांचे ||
  क्या देशविरोधी नारेबाजों से ये कभी किसी ने पूछा है ?
  क्या उन्हें अदालत और जेल में बन्द करना ही देशप्रेम है ?      
  जब लोकतंत्र के मंदिर में कुर्सी,मिर्ची ,जूते चलते |
तो भला बताओ इसमें कौन सा देशप्रेम झलकता है ?
यही नहीं बातों बातों में गोली और पिस्तौल निकलती ,
यह कैसा है देशप्रेम जो संसद में दिखता है ?

अमर्यादित लोकतंत्र यदि देशप्रेम कहलाता है |
फिर अपने मन की अभिव्यक्ति क्यों देशद्रोह बन जाता है ?
आज जरुरत आन पड़ी है इसे समझने समझाने की ,
ऐसी नौबत इतने वर्षों बाद भला क्यों  आई है ?




         

No comments: