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Friday, March 4, 2016

मज़हबी राह से

मजहबी राह से ......
  
 मजहबी  राह  से  गुमराह  होकर  ऐसा है लगता |
  देश अपना है फिर भी जाने क्यूँ अपना नहीं लगता ||

  चलो इक बार हम भी  देश के  होकर दे तो  देखें |
  सोच लोगों की  बदलते हुए  पल भर  नहीं लगता ||

  दूर रखकर  सियासत से  धरम को  आजमाएं हम |
  धर्म को धर्म से  मिलते हुए पल  भर नहीं लगता ||

सभी इंसान  अपने कर्म और  ईमान पर  यदि हों |
  फिर तो इंसानियत को फैलते पल भर नहीं लगता ||

गले अपनों को न लगाएं तो नज़रों से न गिरने दें |
  अपने जो हैं पराये बनने में  पल भर नहीं लगता ||

  कोई मजहब  नहीं हो सकता मेरे  मुल्क से बढ़कर |
  ऐसे मजहब को मिटने में कभी पल भर नहीं लगता ||

  देश में हम  नहीं बसते देश हम  सब में बसता है |
  सुनो ‘आजाद’ ऐसे  मुल्क को कोई छू नहीं सकता ||


कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971


       

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