हो रहे हैं हल्के रिश्ते आजकल के जमाने में |
प्यार भी हल्का हुआ है आज आजमाने में ||
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अब तो बस प्यार में नुमाइशी चेहरे दिखते हैं |
गर्दन कटानेवाले मिलते अब कहाँ जमाने में ||
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वादे और कसमों की बौछार तो करते बहुत |
उसे निभानेवाले मिलते अब कहाँ जमाने में ||
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चन्द सिक्कों के लिए जान लेने पर उतारू |
सबर करनेवाले मिलते अब कहाँ जमाने में ||
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तन, मन, धन लुटानेवाले
दोस्ती के नाम पर |
ऐसे दिलेर दोस्त मिलते अब कहाँ जमाने में ||
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हो गयी हैं मतलबी दिल की धड़कने शायद |
औरों के गम में धडकती अब कहाँ जमाने में ||
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सच कहें ‘आजाद’ सपने भी पराये हो गए |
सपने आँखों में हैं बसते अब कहाँ जमाने में ||


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