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Saturday, December 26, 2015

मैं परदेशी यह देश न भावै |


मैं परदेशी यह देश न भावै |


मैं परदेशी यह देश न भावै |


अपना अपना  जेहि को  समझा वो मारन को धावै ||

हँसना चलना जेहि सिखायौ वहि अब मोहि रुलावै || 

स्वारथ बस सब आपन बोलत फेरि न सम्मुख आवै ||

प्रेम फाँस निकसै नहिं देवै उलझि- उलझि रहि जावै ||
 
माया मोह ने ऐसो बाँध्यौ  कछू  समुझि नहिं आवै ||

कहि ‘आजाद’ रूठ्यौ परदेशी  अपन देश को सिधावै ||


Wednesday, December 23, 2015

बुरे बखत कोई काम ना आवै |





बुरे बखत कोई काम ना आवै |

ब तक  मछरी  पानी  भीतर  सब संग धूम मचावै |

जैसहि  जाल  बीच  है  फँसती  छोडि  सबै भगि जावै ||***********************************

घायल  हरिना  वन -वन  भागै  कतहूँ ठौर नहिं पावै |

उसके रकत  खुदहि   नावक   को हरिना तक पहुंचावै ||

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 संगी - साथी   मारग   बदलत  बात  करत  सकुचावै |

कछु  कहने   से   पहले  ही  वह  अपनी  बिथा  सुनावै ||

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हीं मदद नहीं माँगहि हमसों मनहिं मनहिं घबरावै |

कहि 'आजाद' ऐसो समया  मा मन मिसरी नहिं भावै ||





   

Monday, December 21, 2015

मैंने तुम्हारी चाह में


   मैंने  तुम्हारी  चाह में





मैंने  तुम्हारी  चाह में  क्या –क्या  नहीं किया |
फिर तुमने मुझको इस तरह से क्यों भुला दिया ||
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जिस  दिल  के  आइने  में  तस्वीर  थी मेरी ,
तुमने  वो  सरेआम  क्यों  सबको  दिखा दिया ||
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मेरे  वास्ते  महफ़िल  में कभी  रोक नहीं था ,
किस  वास्ते  तुमने  वहाँ  पहरा  लगा  दिया ||
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ब  सिजदे- मिन्नतों  का  कोई  दौर नहीं है ,
फिर दिल के  मंदिरों  में हमें  क्यों बसा लिया ||
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माना  कि तुमने  मुझको  धोखा  नहीं  दिया ,
‘आज़ाद’  जो  किया  वो  अच्छा  नहीं  किया ||

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Friday, December 18, 2015

जीवन में खुशी के लिए


जीवन  में खुशी के  लिए


जीवन  में खुशी के  लिए संघर्ष  ज़रूरी है |
गैरों की ख़ुशी न छिने यह सबसे  ज़रूरी है ||
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वह दिल नहीं बुझदिल है नहीं प्रेम है जिसमे ,
पर दिल को  लगाने में दिल होना ज़रूरी है ||
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दिल के करीबी बनकर तो  प्यार जताते हैं ,
पर उसको निभाने में कुछ  प्यार ज़रूरी है ||
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अहसानियत के बोझ तो पैसों से नहीं चुकते ,
अहसान  चुकाना है  तो अहसान ज़रूरी है ||
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पैसों की  चमक देख जो  ईमान बेंच देते ,
ऐसे  ईमानदार  से बचना  तो  ज़रूरी है ||
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गिरवी रखी ज़मीर तो फिर क्या रहा वजूद ,
‘आज़ाद’ ऐसे लोग से  दूरी तो ज़रूरी है ||




Wednesday, December 16, 2015

सच्चा कलाकार

            सच्चा कलाकार


दमी बोले या न बोले
उसका काम बोलता है
सत्य पर चढ़े रहस्य के आवरण को
परत दर परत खोलता है |

लाख कोशिशें कर ले कोई
उसकी प्रतिभा को दबाने की
वह दब नहीं सकती बल्कि
और भी घातक हो जाती है |
जैसे किसी स्प्रिंग को 
दबाने पर होता है

ल्टा उससे कभी-कभी
भयंकर नुकसान हो जाता है |
हर आदमी अपने आप में 
एक इनाम होता है |
जिसके कारण उसका नाम होता है |
गँवाना नहीं चाहता एक भी पल
सहेजकर रखता है
स्मृतियों के पन्नों में |

च्चा कलाकार वह होता है
जो अपनी कला से 
बातें करता है बिन बोले ,
निहारता है अपलक प्रेम से |

ह सब कुछ सह सकता है
लेकिन यह शत-प्रतिशत सच है
वह खुद तबाह हो सकता है ,
मगर अपनी कला को
तबाह होते नहीं देख सकता है |





Tuesday, December 15, 2015

किससे कहूँ मैं सखी मन की बातें |

किससे कहूँ मैं सखी --------


किससे कहूँ मैं सखी मन की बातें |

गुनत धुनत  रहती  मन  भीतर  बीतत  दिन अरु रातें |

पिय परदेश न  भेजत  पाती , सपननि  मोहिं  दिखाते ||

कहु  की बातें मन नहिं  भावै ,सुनि सुनि  कान  पिराते |

सूनी  सेज   नींद   नहिं   आवै ,  नयन  खुले  रह  जाते ||

किस  किस  से  मैं  नज़र  बचाऊं,  नैनन  तीर  चलाते |

पिय 'आजाद' चले अब आओ ,तुम बिन मन अकुलाते ||










Saturday, December 12, 2015

हे सखि! रूठि गये पिय मोरे |




हे सखि! रूठि गये पिय मोरे |

कसिक  मनाऊँ मानत  नाहीं, जो कल तक थे भोरे ||

सुबह मनाऊँ, शाम  मनाऊँ ,विनति  करूँ कर जोरे ||

जब जब बात  करन को  चाहूँ , लखत न मेरी ओरे ||

जस अजनबी  बात करे  कोई, वैसे  भये  पिय मोरे ||

सब सपने अब जलत दीखते ,जो हिय रह्यौ बटोरे ||

हे 'आज़ाद' बस्यौ पिय हिय में ,तडपावत मन मोरे ||